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 ईमानदारी….

 ईमानदारी….


विक्की अपने स्कुल में होने वाले "स्वतंत्रता दिवस समारोह" को ले कर बहुत उत्साहित था और वह भी परेड में हिस्सा ले रहा था। इसीलिए वह दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ गया और स्कुल जाने की तैयारी करने लगा लेकिन घर में बहुत अजीब सी शांति थी जो विक्की को अजीब लग रहा था। वह अपनी दादी के कमरे में गया, लेकिन दादी कही दिखाई नहीं पड़ी।

 

“माँ, दादी  कहाँ है?” - उसने पूछा।

“रात को वह बहुत बीमार हो गयी थी इसलिए तुम्हारे पिताजी उन्हें अस्पताल ले गए थे और वे अभी भी वही है उनकी तबियत अभी भी ख़राब है।“ विक्की यह सुनकर बहुत उदास हो गया क्योंकि विक्की अपनी दादी से बेहद प्यार करता था। विक्की की माँ ने पूछा-"क्या तुम मेरे साथ अस्पताल चलोगे, मैं तुम्हारी दादी को देखने अस्पताल जा रही हूँ।" विक्की ने तुरंत "हाँ" कहा और अपनी माँ के साथ अस्पताल जाने के लिए तैयार हो गया और "स्वतंत्र दिवस समारोह" के बारे में सब कुछ भूल गया। स्कुल में स्वतंत्रता दिवस समारोह अच्छी तरह से सम्पन हो गया था पर स्कुल के प्राधान्याचार्य खुश नहीं थे उन्होंने ध्यान दिया की बहुत सारे बच्चे अनुपस्थित थे।  उन्होंने दूसरे दिन सभी अध्यापको को बुलाया और कहा की उन्हें उन सभी विद्ध्यार्थियों के नामो की सूची चाहिए जो समारोह में अनुपस्थित थे। और कुछ देर बाद उनके सामने सभी कक्षायों के अनुपस्थित विद्यार्थियों की सूची उनके मेज पर थी। कक्षा "छे" की सूची बहुत लंबी थी इसलिए वह पहले उसी कक्षा में गए।

 

 जैसे ही वे वह पहुचे, चुपी सी छा गयी। उन्होंने बड़े कठोरतापूर्वक कहा - "मैंने परसो क्या कहा था??"

"यही की हम सभी को स्वतंत्रता दिवस समारोह में उपस्थित होना चाहिए"- कक्षा के एक विद्यार्थी ने जवाब दिया। "तब बहुत सारे बच्चे अनुपस्थित क्यों थे...??"-प्राधान्याचार्य ने सूची  हिलाते हुए कहा। 

 

फिर उन्होंने अनुपस्थित विद्यार्थियों के नाम पुकारे, उन्हें डांटा और अपने डंडे से उनकी हथेली पर मार लगाई।  "अगर तुम लोग राष्ट्रीय समारोह के प्रति इतने लापरवाह हो तो इसका मतलब यही है की तुम लोगो को अपनी मातृभूमि से प्यार नही है, अगली बार ऐसा हुआ तो मैं तुम सबके नाम स्कुल के रजिस्टर से काट दूंगा।" इतना कह कर वह जाने के लिए मुड़े, तभी विक्की आ कर उनके सामने खड़ा हो गया। "क्या बात है..??"- प्रधानाचार्य ने कहा...

 

विक्की बड़े ही आदर से बोला-"सर,  मैं भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थित था, पर शायद गलती से मेरा नाम सूची में नहीं है इसलिए अपने मझे नहीं बुलाया"- ये कहते हुए अपनी हथेली प्रधानाचार्य के सामने फैला दी।  

कक्षा के सभी बच्चे सांसे रोक विक्की को देख रहे थे। प्रधानाचार्य भी उसे कुछ देर तक देखते रहे और उनका कठोर चेहरा नरम हो गया साथ ही गुस्सा भी ख़त्म हो गया । "तुम सजा के हकदार नहीं हो, क्योंकि तुम मे सच कहने की हिम्मत है। मैं तुमसे कारण नहीं पूछुंगा ,लेकिन तुम्हे वचन देना होगा की अगली बार राष्ट्रीय समारोह में उपस्थित होगे। अब जाओ अपनी सीट पर बैठ जाओ।  देखा बच्चो विक्की ने अपनी ईमानदारी दिखाई और वह खुद भी बहुत खुश हुआ की उसने जो किया बहुत अच्छा  किया।


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